आप का भाग्य आप के विचारों में

आप का भाग्य आप के विचारों में
आगे क्या होगा ये नियति ने बहुत पहले निश्चित करके हमारे ललाट पे लिखा है, यह समझ भूल ही में पूरी तौर पर गलत है! दूसरे शब्दों में यही बात कही जा सकेगी की मनुष्य अपने ललाट पर लिखने का कार्य खुद ही अपने कर्मो से करता रहता है ! सच कहा जाय तो आगे क्या होगा, यह सौ प्रतिशत यदि नहीं तो नब्बे प्रतिशत मनुष्य स्वयं ही निश्चित करता है, दूसरा कोई नहीं ! "आज" जो भले कार्य या बुरे कार्य मनुष्य करता है, उसके अनुसार उसका आने वाले कल का भविष्य निश्चित होता है; क्योंकि
आने वाले कल का भविष्य यह आज के कर्मो का फल होता है ! अतः गलती से या मोह में फस कर या अन्य कुछ कारणों से यदि मनुष्य गलत रह पर चल पड़ा, तो निसर्ग ने मनुष्य को जो कर्म - स्वातंत्र्य प्रदान किया है और सही- गलत विचार करने के लिए जो बुद्धि दी है, उसका सही प्रयोग करके उस गलत या टेढ़े रास्ते से आगे खीचते जाने के बजाय, उससे तुरंत मुँह मोड़कर फिर से अपने मूल सीधे रास्ते पर लौट आना आवश्यक होता है ! इस संदर्भ में जीवनविद्या का निम्नलिखित सिद्धांत याद करना अच्छा होगा
लेखक : सद्गुरु श्री. वामनराव पै

1 comment:

pooja gupta said...

Interesting blog post...
Book online bus ticket from Redbus

Worldwide

Flag Counter